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थाने में किसानों के कपड़े उतरवाने की बात सही, दिए जांच के आदेश- गृहमंत्री

भोपाल/टीकमगढ़। टीकमगढ़ में कांग्रेस के ‘खेत बचाओ”, किसान बचाओ” आंदोलन’ के दौरान किसानों के साथ हुई बर्बरता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में बुधवार को कांग्रेसियों ने मध्यप्रदेश में जगह-जगह आंदोलन किए। वहीं, गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने जांच के आदेश दे दिए है।
 गौरतलब है कि मंगलवार को टीकमगढ़ जिले को सूखाग्रस्त घोषित कराने सहित अन्य मांगों को लेकर कांग्रेस के आंदोलन में शामिल हुए सैकड़ों किसानों पर पुलिस ने लाठिया बरसाई थी। इससे नाराज टीकमगढ़ के व्यापारियों ने बुधवार को मार्केट बंद रखा। वहीं, युवा कांग्रेस के अध्यक्ष कुणाल चौधरी सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बुधवार को भोपाल में कपड़े उतार कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
गृहमंत्री ने दिए जांच के आदेश
टीकमगढ़ में किसानों के साथ हुई बर्बरता का मामला तूल पकड़ने पर प्रदेश के गृहमंत्री सिंह ने बुधवार को पुलिस महानिदेशक शुक्ला से पूरे प्रकरण की जानकारी ली। इसके बाद मीडिया से चर्चा करते हुए सिंह ने कहा, थाने में पिटाई की बात तो सामने नहीं आई है, लेकिन कपड़े उतरवाने का मामला सामने आया है। इसकी जांच कराई जा रही है। पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि जांच कराकर तीन दिन में रपट दें। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह था मामला
गौरतलब है कि जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए मंगलवार को किसानों ने कांग्रेस के साथ आंदोलन किया। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की मांग कर रहे किसानों की पुलिस से झड़प हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज कर आंसू गैस के गोले छोड़े। कुछ देर बाद आंदोलन से वापस लौट रहे किसानों से भरी दो ट्रैक्टर-ट्रॉली पुलिस ने रोक लीं उन्हें देहात थाने ले गए। दुनातर से आए किसान रतिराम ने बताया कि हम लोग प्रदर्शन से गांव लौट रहे थे, तभी पुलिस ने रोक लिया और थाने में कपड़े उतरवाने के बाद जमकर पीटा। करीब एक घंटे बाद पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह ने समर्थकों के साथ थाने जाकर किसानों को छुड़ाया।
 कलेक्टर ने 45 मिनट तक इंतजार करवाया, इसलिए बिगड़े हालात
कांग्रेसी कलेक्टर को ज्ञापन देने की मांग करते रहे, लेकिन वे अपने दफ्तर से नीचे नहीं उतरे। जबकि गेट पर केवल 8-10 कांग्रेसी ही ज्ञापन देने गए थे।
इस बीच एडीएम आदित्य सिंह, एएसपी राकेश खाखा कांग्रेसी नेताओं से कलेक्टर चैंबर में चलकर ज्ञापन देने की बात करते रहे।
कांग्रेसी इस बात के लिए राजी नहीं हुए, वे गेट पर ही धरना देकर बैठ गए। करीब 45 मिनट तक कांग्रेसी गेट पर उनके इंतजार में बैठे रहे। आखिरकार कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल को नीचे आना पड़ा।
पूछताछ के लिए बुलाया था
एसपी का कहना है कि किसानों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। यदि लॉकअप में इस तरह की घटना हुई तो जांच कराई जाएगी।
एक भी किसान घायल नहीं हुआ
कलेक्टर के मुताबिक, प्रदर्शन में एक भी किसान घायल नहीं है। मैंने जांच के लिए एसडीएम को मौके पर भेजा था।

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