असर पड़ता है, जिससे एकाग्र होने, याद रखने और स्पष्ट रूप से सोच पाने की क्षमता प्रभावित होती है। हालांकि सिरदर्द, दिल के दौरे, नींद की समस्यों और नसों के निष्क्रिय होने को भी विशेषज्ञ कोरोना से जोड़ते हैं, लेकिन चार साल बाद शोधार्थियों के पास इसके पर्याप्त साक्ष्य हैं कि कोविड मानसिक स्वास्थ्य को कई स्तरों पर प्रभावित कर रहा है। फिलहाल चिकित्सा विज्ञान के पास इसका कोई समाधान भी नहीं है। हाल ही में न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के शोध में बताया गया है कि कोविड संक्रमण मस्तिष्क को प्रभावित करता है। कुछ ऐसे मृतकों के पोस्टमार्टम से, जो कोविड संक्रमित थे पर महीनों बाद दूसरी बीमारियों से मरे, पता चला कि उनके मस्तिष्क में वायरस सक्रिय था। इससे स्पष्ट है कि सार्स-कोव-2 सिर्फ सांसों से संक्रमण नहीं फैलाता, बल्कि यह वायरस कुछ लोगों के मस्तिष्क में भी प्रवेश कर सकता है। जायद अल एली शोधार्थियों ने पाया कि जो लोग पहले कोविड से संक्रमित हुए थे, उनकी स्मरण शक्ति घटी है, और जो काम उन्हें दिया जाता है, उसे वे सफाई से नहीं कर पाते। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में पिछले दिनों प्रकाशित एक दूसरी अध्ययन रिपोर्ट का निष्कर्ष भी इससे मिलता-जुलता है। जर्नल ने कुल 1,13,000 लोगों के कौशल और व्यावहारिक ज्ञान की परीक्षा ली। शोधार्थियों ने पाया कि जो लोग पहले कोविड से संक्रमित हुए थे, उनकी स्मरण शक्ति घटी है, और जो काम उन्हें दिया जाता है, उसे वे सफाई से नहीं कर पाते। यह कमी उन लोगों में ज्यादा देखी गई, जो बिल्कुल शुरुआती दौर में संक्रमित हुए थे। इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन्हें मामूली संक्रमण हुआ था, उनकी तुलना में गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों के सामान्य ज्ञान में ज्यादा कमी आई, जबकि अस्पतालों में इलाज करा चुके लोगों के सामान्य ज्ञान का स्तर और भी कम हो गया। • एक हालिया सर्वे में पाया गया कि कोविड के बाद से करीब 10 लाख कामकाजी लोगों को याद रखने में समस्या होने लगी है। यह समस्या 18-44 आयु वर्ग में ज्यादा है। ऐसे ही, अमेरिका में आबादी से जुड़े एक हालिया सर्वे में पाया गया कि कोविड के बाद से करीब 10 लाख कामकाजी लोगों को याद रखने में समस्या होने लगी है। यह समस्या 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों में ज्यादा है। यूरोपीय संघ में भी वर्ष 2022 में 15 प्रतिशत लोगों ने स्मरण शक्ति से जुड़ी समस्याओं के बारे में बताया। ज्यादातर शोधार्थी अब एकमत हैं कि कोविड-19 को ऐसे वायरस के रूप में देखना चाहिए, जिसका मस्तिष्क पर भीषण असर पड़ता है। लिहाजा गहरे अर्थ में कोविड बड़ी मानवीय आबादी और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।

By Snews

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