सुप्रीम कोर्ट ने योग गुरु बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद को रोग पूरी तरह ठीक करने के दावे वाले भ्रामक विज्ञापनों और कोर्ट को दिए गए वादे के उल्लंघन पर कड़ी फटकार लगाते हुए अवमानना नोटिस जारी • किया है। शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को पतंजलि आयुर्वेद व उसके निदेशकों को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न उनके विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। कोर्ट ने दो सप्ताह में जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने बीमारियों का इलाज के लिए बने कंपनी के उत्पादों के विज्ञापनों या ब्रांडिंग पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट नें पतंजलि आयुर्वेद को आगाह किया है कि वे प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में किसी भी दवा प्रणाली के विरुद्ध बयान नहीं देंगे जैसा कि उन्होंने शपथ-पत्र में कहा था। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानुल्लाह की पीठ ने ये आदेश पतंजलि आयुर्वेद को उसके उत्पादों की प्रभावकारिता के बारे में भ्रामक दावे करने के मामले में सुनवाई के दौरान दिए। अदालत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) की याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें रामदेव पर टीकाकरण अभियान और आधुनिक दवाओं के विरुद्ध अभियान चलाने का आरोप लगाया गया है। पीठ ने मामले को तीन सप्ताह बाद फिर

सुप्रीम कोर्ट में आदेश दिया। याची की ओर से आरोप लगाया गया कि पतंजलि ने कोर्ट में दिए शपथ-पत्र और कोर्ट के आदेश के बावजूद अपने उत्पादों की औषधीय प्रभावकारिता के बारे में भ्रामक दावे जारी रखे हैं। याची की ओर से सुप्रीम कोर्ट के 21 नवंबर, 2023 के आदेश का हवाला भी दिया गया, साथ ही कहा गया कि उसके बाद इन्होंने ब्लड प्रेशर से राहत के बारे प्रेस कान्फ्रेंस की। पीठ ने पतंजलि को फटकार लगाई और 2022 से याचिका लंबित होने के बावजूद भ्रामक विज्ञापन से नहीं निपटने पर केंद्र सरकार की आलोचना की। कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश वकील

कहा कि पूरे देश को चकमार कर रहे हैं, जबकि औषधीय अधिनियम कहता है कि यह निषिद्ध है। केंद्र को तत्काल कुछ करना होगा। पीठ ने कहा कि वह विज्ञापनों पर रोक लगाने की इच्छुक है। कोर्ट ने कहा कि पिछले आदेश में कहा गया था कि किसी अन्य औषधीय प्रणाली के बारे में बयान नहीं दिया जाएगा। जस्टिस कोहली ने कहा कि स्थायी राहत की बात कहना भ्रामक और कानून के विरुद्ध है। कोर्ट ने कहा कि आप इससे इन्कार नहीं कर सकते कि ये विज्ञापन कोर्ट के आदेश और शपथ-पत्र के बाद छपे। नवंबर के आदेश के बाद छपे एक विज्ञापन पर कोर्ट ने आपत्ति व्यक्त की।

By Snews

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