श्रीराम जाति-संप्रदाय से ऊपर मानव मात्र की आस्था के केंद्र

संसू, अयोध्या: श्रीराम जाति-संप्रदाय से ऊपर मानव मात्र की आस्था के केंद्र हैं। यह सत्य मंगलवार को पूरी रम्यता से प्रतिष्ठित हुआ, जब सौ से अधिक मुस्लिमों ने पूरे भाव-चाव से रामलला का दर्शन किया। जियनपुर स्थित कबीर धर्म मंदिर से जुड़े महंत उमाशंकरदास एवं मुस्लिम मंच के संयोजक डा. अनिल सिंह के प्रांतीय संयोजन यात्रा के में मुस्लिम श्रद्धालु सद्भावना रूप में रामलला की चौखट तक पहुंचे। रामलला का दर्शन करने वालों में

राष्ट्रीय सद्भावना मंच की संयोजक चकी। यात्रा रवाना करने से पूर्व अपने उद्बोधन में इंद्रेश कुमार ने कहा, आज भारत का मुसलमान राममय हो चुका वं है। ये वे मुस्लिम हैं, जिन्होंने राम – मंदिर के लिए कठिन संघर्ष किया। – ‘हक के साथ आओ और भव्य राम मंदिर का निर्माण करो’ का ध्येय वाक्य शिरोधार्य कर मुस्लिम मंच के लोगों ने देश में जगह-जगह संगोष्ठियां कीं। रामजन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण हुआ और पुनः मुस्लिम समाज के ये लोग लगातार श्रीराम का दर्शन करने आ रहे हैं। इंद्रेशकुमार ने कहा कि एनआरसी से भारत का मुसलमान खुश है। यह कानून सबके लिए और सर्व समाज के विकास के लिए है। अब भारत का मुसलमान किसी के बहकावे में आने वाला नहीं है और जो राष्ट्र का विकास करेगा, जो सबका साथ- सबका विकास चाहेगा, उसी के साथ भारत का मुसलमान खड़ा रहेगा। रामलला के दर्शन के अभियान का संयोजन कर रहे महंत उमाशंकरदास ने कहा, रामलला की स्थापना से सद्भावना के नए युग का सूत्रपात हुआ है और इसकी प्रामाणिकता रामलला के दर्शन के लिए बड़ी से संख्या में आ रहे मुस्लिमों से भी पुष्ट पात हो रही है। यह इस सत्य का भी कता परिचायक है कि पूजा पद्धति भले अलग हो, किंतु श्रीराम हिंदुओं की तरह मुस्लिमों के भी पूर्वज हैं और वे अपने ढंग से श्रीराम को शिरोधार्य कर रहे हैं।

By Snews

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